पुनरागमन
पुनरागमन पुरातन काल के शिवलिंग की सुनी है हमने एक कहानी एक शिवलिंग जो हवा मे तैरता था बताती थीं नानी आश्चर्य से सुना करती थी उनकी बात शिवलिंग हवा मे जो तैरे क्या हो सकता है उसका राज इतिहास के पन्नों ने यह दर्ज़ किया क्रूर ग़ज़नी ने जो आक्रमण किया एक नही दो नही तीन नही सत्तरा बार दुष्ट ने सोमनाथ पर किया प्रहार लूट मचाने क्रूर महमूद ग़ज़नी आया जब मळेची तलवारो ने मचाया आतंक का साया पर वीर राजपुताना न मानी हार शीश कटा कर धड भी उनका रहा लड़ता यह बात को इतिहास जोर जोर से है कहता भरे अपने खजाने मंदिरो को लूट पर सत्तरवी हमले मे पवित्र ज्योतिर्लिंग गयी टूट लहू लुहान हुऐ मंदिर के द्वार जहाँ सजते पुष्प मलाओ के हार चन्दन ओर हवन का जहाँ था सुवास आज पीड़ा से भरी उसकी आवाज़ हर हर महादेव और ओमकार का जहाँ होता था नाद उन इमरतो को तोड़ गया जल्लाद डबडबाई आँख, मन हुआ उदास परन्तु चित्त मे अभी थी एक आस जान बचा कुछ अग्निहोत्री आये उठाने टूटे ...






