मै लक्ष्मी हूँ
मै लक्ष्मी हूँ मै लक्ष्मी हूँ सोने चांदी से अलंकृत ज्ञान की गंगा मे बहते कमल पर मेरा वास मधुर वाणी से झंकृत होने नही देती किसी को उदास मै लक्ष्मी हूँ हो जिधर सत्यनिष्ठा वहीं मेरी घानिष्ठा सुप्त जगत हो या जागृत सर्वत्र मेरा आभास मैं लक्ष्मी हूँ आवाहन का मेरा एक ही मात्र शुद्ध चेतना की अग्नि से प्रकट होने वाली देवी मैं अक्षय होते मेरे पात्र मैं लक्ष्मी हूँ मनुष्यों मे जो हो उत्तम उस निर्मल मन मे मेरा वास छल कपट से दूर रहती पुरुषोत्तम के पास सृष्टि






