पुनरागमन

 




पुनरागमन


पुरातन काल के शिवलिंग की सुनी है मैने एक कहानी 

एक शिवलिंग जो हवा मे तैरता था बताती थीं नानी 


आश्चर्य से सुनती थी उनकी बात 

शिवलिंग हवा मे जो तैरे 

क्या हो सकता है उसका राज


इतिहास के पन्नों मे है अंकित 

क्रूर ग़ज़नी ने जो मंदिर किया खंडित 


एक नही 

दो नही 

तीन नही 

सत्रह बार दुष्ट ने सोमनाथ पर किया प्रहार 

पर वीर राजपुताना ने न मानी हार 

शीश कटा कर धड उनका लड़ता रहा 

पराजय नही थी उन्हें कत्तई स्वीकार 

परन्तु लूट-खसूट मचाने क्रूर दुश्मन आया 

 मळेची तलवारो ने मचाया आतंक का साया 

भरे शत्रु ने अपने खजाने मंदिरो को लूट 

और सत्रहवें हमले मे, पवित्र ज्योतिर्लिंग गयी टूट 


हर हर महादेव और ओंकार का जहाँ होता था नाद 

उन इमरतो को तोड़ गया जल्लाद 

लहू लुहान हुऐ मंदिर के द्वार 

जहाँ सजते पुष्प मलाओ के हार 

चन्दन और हवन का जहाँ था सुवास 

आज पीड़ा से भरी उसकी आवाज़ 


डबडबाई आँखे, मन हुआ उदास 

परन्तु चित्त मे थी अभी भी एक आस 

जान बचा कुछ अग्निहोत्री आये 

उठाने टूटे हुऐ ज्योतिर्लिंग के शेष 

बाँध कर बड़े सम्मान से उन टुकड़ो को 

ले गए उसको सौराष्ट्र से दूर देश 


टूटे टुकड़े चल पड़े दक्षिण भारत की ओर 

पीड़ित हृदयो ने पकड़, भक्ति की डोर 


मंदिर ध्वस्त हुआ 

ध्वस्त हुयी वहाँ की आन बान शान 

पर ध्वस्त न कर पाया ग़ज़नी 

वह प्राचीन सनातन ज्ञान 

रुके नही रुद्रम के मंत्रोच्चार

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से था जिनको प्यार

'जिसकी होती थी पूजा 

आज पापी के हाथ, पड़ा था टूटा '

यह कष्ट को वह सह न पाए 

और एक टूटे हुऐ ज्योतिर्लिंग के

उन्होंने छोटे छोटे लिंग बनाये 


समय नही था वो अनुकूल 

इसलिए बिना किये कोई भूल 

इस बात को बना कर एक गुप्त राज़ 

की उन्होंने सोमनाथ शिवलिंग की पूजा 

बिना उठाए आवाज़ 


आयी मुग़लई सलतनत, 

आयी अंग्रेजी की हुकूमत का ताज 

बीत गये कई अर्स 

पर यह बात बनी रही उनकी पुश्तैनी राज 


सबने सोचा ज्योतिर्लिंग तो टूट गया 

धीरे धीरे स्वतंत्रता संग्राम मे देश डूब गया 

मंदिर भी सदियों तक पड़ा रहा विध्वंस

पर क्या पता उन्हें वीर पुरोहितो ने 

करी गुप्त सेवा, उनकी थें जो सोमनाथ के अंश 


कांची के शांकराचार्य के पास फिर गये वो एक बार 

अदभुत भविष्यवाणी की उन्होंने 

जिसकी थी महिमा अपार


"सौ साल बाद दक्षिण भारत मे 

होंगे ऐसे संत,

वापस लाएंगे वो दिव्य ज्योतिर्लिंग की महिमा अनंत

राम लल्ला का अयोध्या मे जब होगा पुनः निवास 

नाम मे होगा जिनके शंकर, लेकर जाना उनके पास

तब तक गोपनीय रखना यह बात"


किया उस परिवार ने सौ वर्ष खत्म होने का इंतज़ार

फिर आया वो दिन महा कुम्भ का 

जब नक्षत्र संरेखण मे थें कुछ तारे हज़ार 


लेकर गये उन दिव्य लिंग के टुकड़ो को उन महात्मा के पास 🙏

अब बताती हूँ, क्यूँ ये कविता है खास 

यूँ तो ज्योतिर्लिंग दर्शन करने लोग अलग अलग धाम जाते हैं 

कुछ लोग शिव को पाने, बड़ी बड़ी शिव की प्रतिमा बनाते हैं 

पर पवित्र पावन दिव्य सोमनाथ ज्योतिर्लिंग स्वयं, 

परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के पास आते हैं 🙏


ढोल, नगाड़े, शांखनाद, मन्त्रोंचारण से हुआ 

दिव्य जयतोर्लिंग का स्वागत 

विश्व के सामने पुनः सोमनाथ हुऐ प्रकट 🙏


शीघ्र होगा उनका पुनारपि सोमनाथ मे वास 

तब तक भारत भ्रमण करा रखे हैं उनके दास 


और हवा मे जो तैरने वाली थी बात 

चुंबकीय ऊर्जा है शिवलिंग मे, हुआ अब सबको ज्ञात 

यह कविता नही, ये है इतिहास 

मेरे लिए बहुत....हम सबके लिए बहुत ही खास....


पुनरागमन हुआ उनका जो कभी गये ही नही थें

ह्रदय मे तब भी थें, ह्रदय मे अब भी हैं 



✨✨


And I bow down to the keepers of the ancient traditions, to that family 🙏🙏 

Again and again 


 

सोमेश्वराय, शिव, सोमेश्वराय,

हर-हर भोले नमः शिवाय,

सोमेश्वराय, शिव, सोमेश्वराय,

ॐ नमः शिवायः ॐ नमः शिवायः 

हर-हर भोले नमः शिवाय


🙏



Shristee Singh 
















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